न्याहरी कृष्णाची घेउनी
न्याहरी कृष्णाची घेउनी
निघाली गवळण वृंदावनी
वैशाख तापतो, ऊन न लागे तिला
टोचता कळेना काटाही पाऊला
हरीवेडी होउनी-
निघाली गवळण वृंदावनी
आजच्या पहाटे हाक मारल्याविना
श्रीरंग जाई तो घेउनिया गोधना
यमुनातटी चालली-
निघाली गवळण वृंदावनी
एकांत पाहुनी भेटुन मनमोहना
आपल्या करे ती भरवील दध्योदना
हनुवटी कुरवाळुनी-
निघाली गवळण वृंदावनी
निघाली गवळण वृंदावनी
वैशाख तापतो, ऊन न लागे तिला
टोचता कळेना काटाही पाऊला
हरीवेडी होउनी-
निघाली गवळण वृंदावनी
आजच्या पहाटे हाक मारल्याविना
श्रीरंग जाई तो घेउनिया गोधना
यमुनातटी चालली-
निघाली गवळण वृंदावनी
एकांत पाहुनी भेटुन मनमोहना
आपल्या करे ती भरवील दध्योदना
हनुवटी कुरवाळुनी-
निघाली गवळण वृंदावनी
| गीत | - | ग. दि. माडगूळकर |
| संगीत | - | स्नेहल भाटकर |
| स्वर | - | कुमुदिनी पेडणेकर |
| चित्रपट | - | तुका झालासे कळस (१९६४) |


















