अधिर मन बावरे
अधिर मन बावरे, घेइ आंदोलने ।
विविध भावांवरि प्रेमशंकागुणें ॥
दयित हृदयांतले अणु जरी लाभलें ।
स्थल, विसावेल मन ।
कांतागुणचिंतने ॥
विविध भावांवरि प्रेमशंकागुणें ॥
दयित हृदयांतले अणु जरी लाभलें ।
स्थल, विसावेल मन ।
कांतागुणचिंतने ॥
| गीत | - | ना. सी. फडके |
| संगीत | - | केशवराव भोळे, हिराबाई बडोदेकर |
| स्वर | - | हिराबाई बडोदेकर |
| नाटक | - | युगांतर (१९३१) |
| राग | - | पटदीप |
| ताल | - | झपताल |


















